School में phone अब नहीं बजेंगे! दक्षिण कोरिया सरकार ने बच्चों को मोबाइल फोन नहीं देने का फैसला किया है। यह नियम मार्च 2026 से लागू होगा।

अगस्त 2025 में, दक्षिण कोरिया की संसद ने जैसे अन्य डिजिटल एवं मोबाइल को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया। Social media की बढ़ती लत और शिक्षण वातावरण में हो रही असुविधा को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।

दक्षिण कोरिया में मोबाइल फोन पर विद्यालयों में प्रतिबंध लागू होना छात्रों की पढ़ाई और ध्यान केंद्रित करने में मदद कर सकता है।यह नियम राष्ट्रीय विधेयक के रूप में 1 मार्च 2026 से प्रभावी होगा और इसे नए शैक्षिक सत्र शुरू होने से पहले लागू किया जाएगा। कई प्रतिष्ठित समाचार स्रोतों जैसे Reuters, NDTV, Times of India आदि ने भी इस बात पर प्रकाश डाला कि यह कानून अगले शैक्षणिक वर्ष (मार्च 2026) से लागू होगा।

यह मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों (जैसे स्मार्टफोन, टैबलेट इत्यादि) का स्कूल कक्षा के दौरान उपयोग पूर्णतः प्रतिबंधित करता है। लागू होने का समय: 1 मार्च 2026 (शैक्षणिक वर्ष शुरू होने से एक दिन पहले)। उद्देश्य: बढ़ती स्मार्टफोन लत, सोशल मीडिया की निर्भरता और इससे प्रभावित होने वाले शैक्षिक और मानसिक स्वास्थ्य कारकों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।

इस प्रतिबंध में कुछ महत्वपूर्ण अपवादों का स्थान है, जो विशेष परिस्थितियों में मोबाइल फोन या स्मार्ट उपकरणों के उपयोग को वैध बनाते हैं। दक्षिण कोरिया में यह पूर्व-प्राथमिक (primary), माध्यमिक (middle) और उच्च विद्यालय (high schools)—इन सभी स्तरों में लागू होता है।यानी सभी शैक्षणिक संस्थानों पर यह प्रतिबंध प्रभावी रहेगा।यदि कोई छात्र शिक्षण या अधिगम (learning) गतिविधियों के लिए मोबाइल उपकरण का उपयोग करना चाहता है, तो यह अनुमति विद्यालय के अधिकारियों या शिक्षकों की मंजूरी से संभव है।किसी संकट या आपात स्थिति में छात्रों को फोन का उपयोग करने की अनुमति दी जा सकती है, बशर्ते उन्हें स्कूल प्रशासन की पूर्व स्वीकृति प्राप्त हो।जिन छात्रों को फोन या उपकरणों की आवश्यकता होती है—उन्हें विशेष शिक्षा या सहायता के लिए इन्हें उपयोग करने की अनुमति है, बशर्ते कि स्कूल प्रशासन से उचित मंजूरी प्राप्त हो।

दक्षिण कोरिया के शैक्षणिक संस्थानों (पूर्व-प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च विद्यालय) में मोबाइल फोन या स्मार्ट उपकरणों के उपयोग पर प्रतिबंध है, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण अपवाद हैं:शिक्षण या अधिगम के लिए उपयोग: छात्रों को मोबाइल उपकरणों का उपयोग तभी करने की अनुमति होती है जब विद्यालय के अधिकारी या शिक्षक इसकी मंजूरी दें।संकट या आपात स्थिति: आपातकालीन परिस्थितियों में छात्रों को फोन उपयोग की अनुमति दी जा सकती है, बशर्ते स्कूल प्रशासन से पूर्व स्वीकृति हो।विशेष शिक्षा या सहायता: जिन छात्रों को विशेष शिक्षा या सहायता की जरूरत होती है, उन्हें भी उपकरणों के उपयोग की अनुमति है, यदि स्कूल प्रशासन से उचित अनुमति प्राप्त हो।इस प्रकार, प्रतिबंध के बावजूद विशेष परिस्थितियों में मोबाइल उपकरणों के उपयोग को वैध बनाया गया है, जिससे छात्रों की आवश्यकताओं और सुरक्षा को ध्यान में रखा गया है।

इस निर्णय के पीछे विशेष चिंता सामाजिक मीडिया के अत्यधिक उपयोग से बच्चों में लत, नींद की कमी और चिंता है। सर्वे के अनुसार, माध्यमिक और उच्च विद्यालय के लगभग 37% विद्यार्थियों ने बताया कि सोशल मीडिया उनके दैनिक जीवन पर प्रभाव डालता है, और 22% विद्यार्थियों को सोशल मीडिया न मिलने की चिंता है।

यह चिंता समझने योग्य है क्योंकि डिजिटल अधिकारों का उल्लंघन सीधे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और गोपनीयता को प्रभावित करता है। छात्रों को अपने निर्णय स्वतंत्र रूप से लेने का अधिकार होना चाहिए, और यदि कोई कदम इस स्वतंत्रता को सीमित करता है, तो उसे गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

दक्षिण कोरिया इस प्रवृत्ति में अग्रणी है, जबकि नीदरलैंड्स, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया सहित अनेक देशों ने विद्यालयों में मोबाइल फोन पर प्रतिबंध या नियंत्रण लागू किया है। समाचारों के अनुसार, नीदरलैंड्स में विद्यालयों में फोन प्रतिबंध लागू होने से ध्यान केंद्रित करने में सुधार होगा।

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