बिहार में नीतीश बीजेपी सरकार के खिलाफ यह भीड़ बगावत में उतर गई है। जो बुद्धा पार्क है पटना में, कितना मैसिव जो विरोध प्रदर्शन है, वह हो रहा है। सरकार ने उन 8000 से ज्यादा जो सर्वे करने वाले अधिकारी हैं, जो सर्वे करने वाले लोग हैं, उनको बर्खास्त कर दिया। उनकी नौकरी छीन ली है और उसी के विरोध में ये जो शर्मीकर्मी हैं, वे लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। यह संविदा चला जो हम लोग काम करते थे, उसको फिर से बर्खास्त कर दिया। फिर से हम लोग सेवा बहाल के लिए आवाज उठा रहे हैं।
सरकार से उन लोगों की यही मांग है कि जितने भी 8000 कर्मी को बर्खास्त किया है, उनको सबसे पहले जॉइनिंग दी जाए और उनके बाद जाकर जो उन लोगों की जो दूसरी मांग है, 60 साल की जाए। बर्खास्त करने की ये सरकार की रणनीति है। यहाँ के लोग ने 27 दिन से धरना दे रहे थे। उनके बाद जाकर उन लोगों को 4 तारीख को बर्खास्त कर दिया। वे शांतिपूर्वक धरना दे रहे थे। और अगर सरकार और अगर सरकार आपकी बातें नहीं मानती है, चाहे मर जाएं, अलग बात है, मगर उनको मानना ही पड़ेगा, हर हाल में मानना पड़ेगा। बिहार के लोगों की मांग यही है कि सेवा में भी नहीं उनको मारना चाहिए।
कहा जा रहा है कि उन 8000 कर्मियों को बर्खास्त कर दिया गया। उनका कहना है कि उन्हें परमानेंट किया जाए और उनके लोगों को बर्खास्त न करें। उन लोगों के लिए शांतिपुर का 26वां दिन हम लोग बीजेपी कार्यालय के पास गए। यहां कैंडल मार्च किस तरह से अब किया जाएगा और ये लोग जो आगे लगातार आगे बढ़ते जा रहे हैं और इतनी भीड़ बाप रे बाप इधर एक बार ये पहुंचने दिखाई इसमें लिखा हुआ है ‘आंदोलनकारियों पर बड़बड़ पुलिसिया कारवाई, भाजपा निधि सरकार सर्व करो, नौकरी छीनना बंद करो’, जो कहा जा रहा है।
बिहार के सड़कों में लगभग 1 कि.मी. से ज्यादा लंबी लाइन लगी हुई है और अभी भी सारे प्रदर्शनकार जारी है। जो संविदामी है वो बुद्धा पार्क के सामने इकट्ठा हो गए हैं। कल बीजेपी के यहां पे उनका एक दोस्त को जख्मी हो गए हैं। उनका सर फूट गया। इवन मुझे भी चोट लगी है हाथ में। ये अत्याचार यहां पे हाथ में चोट लगी है। इन्होंने बड़ा सा बैनर में लिखा हुआ है भाजपा नितीश सरकार सर्व करो। नौकरी छीनना बंद करो।
बरखास्त 7480 विशेष सर्वेक्षण कर्मियों को तत्काल सेवा में वापस लो। सभी मांगे पूरी करो। और यहां सभी विशेष सर्वेक्षण कर्मियों की सेवा नियमित करो। सर्वेक्षण कर्मी, यानी जो सर्वेक्षण कर्मी हैं, वो लगातार अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं।
उनका कहना है कि उन लोग इंजीनियर हैं; एक इंजीनियर ठान ले तो कुछ भी हो सकता है। है।सरकार से यही विनती करते हैं कि हम लोगों को नियमित किया जाए और हमारे साथी जितने भी टर्मिनेट हुए उनको नौकरी को वापस किया जाए।






