
15 अगस्त 2025 को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12वीं बार देश को लाल किले की प्राचीर से संबोधित किया, जो एक ऐतिहासिक क्षण बन गया था। उन्होंने इस अवसर पर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का रिकॉर्ड तोड़ दिया, जिन्होंने अपने कार्यकाल में 11 बार स्वतंत्रता दिवस पर देश को संबोधित किया था। स्वतंत्र भारत के इतिहास में, नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर देश को सबसे अधिक बार भाषण देने वाले प्रधानमंत्री बन गए हैं।
2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर पहली बार भाषण दिया था। तब से लेकर आज तक, वे हर साल इस राष्ट्रीय उत्सव पर देशवासियों को भाषण देते आ रहे हैं। उनके भाषणों में न केवल योजनाओं की घोषणा की जाती है, बल्कि देश की आर्थिक, सामाजिक और वैश्विक स्थिति पर उनके विचार भी व्यक्त किए जाते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस वर्ष के अपने संबोधन में कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया। उन्होंने डिजिटल भारत की प्रगति, आत्मनिर्भर भारत अभियान, महिला सशक्तिकरण, कृषि सुधार और युवाओं की भूमिका पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत आने वाले दशक को “भारत का दशक” बनाने की दिशा में काम कर रहा है क्योंकि देश अब वैश्विक मंच पर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने “आत्मनिर्भर भारत” का सिद्धांत उठाया और कहा कि यह सिर्फ व्यापार और विदेशी मुद्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि एक व्यापक दृष्टिकोण है जो अर्थव्यवस्था, रणनीति और अवसंरचना को शामिल करता है।उन्होंने कहा “मेड इन इंडिया” से निर्मित सेमीकंडक्टर चिप्स” वर्ष 2025 तक बाजार में उपलब्ध होंगे। साथ ही, उन्होंने जीएसटी में सुधारों का ऐलान किया। यह अक्टूबर तक मध्यमवर्गीय लोगों और व्यापारियों के लिए फायदेमंद हो सकता है।
उन्होंने “Mission Sudarshan Chakra” की घोषणा की, जो एक नवीनतम, अत्याधुनिक रक्षा प्रणाली है, जो दुश्मन के हमलों को नाकाम करने और तेज प्रतिक्रिया देने में सक्षम कहा।
इंदिरा गांधी के कार्यकाल में कई राजनीतिक परिवर्तन हुए, लेकिन उन्होंने लगातार 11 बार स्वतंत्रता दिवस पर देश को संबोधित किया था। नरेंद्र मोदी की बारहवीं पारी एक राजनीतिक उपलब्धि है जो उनकी निरंतर नेतृत्व क्षमता और लोकप्रियता का प्रमाण है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ऐतिहासिक भाषण में देशवासियों को प्रेरणा दी, जिसमें उन्होंने पिछले वर्षों की सफलताओं की चर्चा करते हुए आने वाले भविष्य का भी प्रस्तुत किया। स्वतंत्रता दिवस 2025 में न केवल आजादी का पर्व था, बल्कि लोकतंत्र और शासन व्यवस्था की निरंतरता का प्रतीक भी था।






