सुबीर चटर्जी को राष्ट्रीय पत्रकार रत्न पुरस्कार प्रदान किया गया। पत्रकार रत्नों का अर्थ क्या है?

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झारखंड के दुमका शहर: भारतीय क्षेत्रीय पत्रकार संघ की 25वीं वर्षगांठ पर, झारखंड की उपराजधानी दुमका के वरिष्ठ पत्रकार सुबीर चटर्जी को देश स्तर का प्रतिष्ठित ‘पत्रकार रत्न पुरस्कार’ से सम्मानित किया जा रहा है। झारखंड से इस बार सिर्फ संथाल परगना से सुबीर चटर्जी को यह सम्मान मिला है।:20 वर्षों से पत्रकारिता का सशक्त मार्ग सुबीर चटर्जी ने पिछले दो दशक से पत्रकारिता की दुनिया में काम किया है। उनका करियर देश का सर्वश्रेष्ठ हिंदी दैनिक आज अखबार से शुरू हुआ था। बाद में सहारा समय से कुछ समय जुड़े और फिर डीटीवी (पूर्वईया लाइव) में दुमका संवाददाता बन गए।

2007 से 2014 तक, सिनेमा जगत के प्रसिद्ध निर्देशक प्रकाश झा के चैनल मौर्य टीवी में देवघर और दुमका के संवाददाता के रूप में बेहतरीन रिपोर्टिंग की। वे जी मीडिया कॉर्पोरेशन लिमिटेड के जी बिहार/झारखंड चैनल में दुमका जिला संवाददाता हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग में महारथी सुबीर चटर्जी ने बहुत कम उम्र में पत्रकारिता शुरू की और जीरो ग्राउंड रिपोर्टिंग करके सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है। इनके रिपोर्ट्स ने न केवल जनता की आवाज उठाई है, बल्कि नीतियों में बदलाव भी लाया है।

ग्राउंड रिपोर्टिंग में महारथी सुबीर चटर्जी ने बहुत कम उम्र में पत्रकारिता शुरू की और जीरो ग्राउंड रिपोर्टिंग करके सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है। इनके रिपोर्ट्स ने न केवल जनता की आवाज उठाई है, बल्कि नीतियों में बदलाव भी लाया है। झारखंड और दुमका के वरिष्ठ संपादकों और प्रसिद्ध पत्रकारों की उपस्थिति में सम्मानपूर्वक ‘पत्रकार रत्न सम्मान’ का चयन हुआ। यही कारण है कि सुबीर चटर्जी को दुमका जैसे छोटे से शहर से चुना जाना पूरे संथाल परगना और झारखंड के लिए गर्व की बात है।

25वीं वर्षगांठ पर सम्मान झारखंड से सिर्फ दो पत्रकार चुने गए :20 वर्षों से पत्रकारिता आज, सहारा समय, डीटीवी, मौर्य टीवी और जी मीडिया“यह सम्मान मेरे लिए नहीं, बल्कि संथाल परगना के हर उस पत्रकार के लिए है जो सीमित संसाधनों में जनता की आवाज़ उठाने का काम कर रहे हैं,” सुबीर चटर्जी ने कहा। इससे जिम्मेदारी बढ़ी है। ”

“पत्रकार रत्न” एक औपचारिक राष्ट्रीय पुरस्कार नहीं है जो भारत सरकार द्वारा दिया जाता है. इसके बजाय, यह कुछ पत्रकार संगठनों, संस्थाओं या सामाजिक या सांस्कृतिक मददाताओं द्वारा दिया जाता है, जो पत्रकारों के उत्कृष्ट योगदान और उनके समाज में प्रभाव को सम्मानित करते हैं।”पत्रकार रत्न” पुरस्कार— स्थापना और उद्देश्य: “पत्रकार रत्न” की उपाधि को कई गैर-सरकारी पत्रकार संघों, साहित्यिक मंचों, सामाजिक या धार्मिक संस्थाओं (जैसे “हिंदू महासभा”, “वीर भाषा हिन्दी साहित्यपीठ” आदि) ने अपने क्षेत्र या विचारधारा से जुड़े पत्रकारों को सम्मानित करने के लिए दिया जाता है।

पत्रकार रत्नों का अर्थ क्या है?

1. स्थानीय या राज्यस्तरीय कार्यक्रमों (जैसे नवादा, हाथरस और जोधपुर) में यह सम्मान दिया जाता है।

2. मरणोपरांत सम्मान (जैसे हाथरस/कासगंज में)प्राप्तकर्ता और चयन: अधिकांश वरिष्ठ स्थानीय पत्रकार या सामाजिक-जनहित अभियान चलाने वाले सम्मानित हैं। प्रशस्ति-पत्र, स्मृति-चिन्ह, शॉल, रिज़नर (भारतीय अर्थव्यवस्था में नकद?), प्रतीक प्रतिमा आदि सम्मान की सामग्री होती हैं।

विशेषताएं :- 1. राज्य-प्रशासित नहीं— यह कोई सरकारी सम्मान नहीं है, जैसे “पद्म पुरस्कार” या “राजा राम मोहन रॉय पुरस्कार”।

2। स्थानीय या स्थानीय— अलग-अलग संगठनों द्वारा अलग-अलग अवसरों पर दिया जाता है।

3. पुरस्कारों में भिन्नता— इन सम्मानों की प्रतिष्ठा क्षेत्रीय पत्रकारिता और संस्थाओं पर निर्भर करती है।निष्कर्ष: स्थानीय और क्षेत्रीय पत्रकारिता में सक्रिय पत्रकारों को उनके योगदान के लिए सम्मानित करने वाली एक महत्वपूर्ण पुरस्कार है, पत्रकार रत्न। यह प्रेरणा, संस्थागत विश्वास और पत्रकारिता के मूल्यों को सुदृढ़ करने में सहायक है।

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