भारत ने डिजिटल भुगतान में पहला स्थान हासिल किया: UPI से हर महीने 1800 करोड़ लेनदेन होते हैं, जो दुनिया का 50% रियल-टाइम भुगतान है।

भारत अब डिजिटल भुगतान का विश्व प्रमुख है। देश में हर महीने 1800 करोड़ से अधिक लेनदेन यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) से होते हैं, जो वैश्विक स्तर पर रीयल-टाइम डिजिटल भुगतान का करीब 50% है।
नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2025 तक UPI के माध्यम से ₹1800 करोड़ से अधिक के लेनदेन हुए, जिसका मूल्य ₹25 लाख करोड़ से अधिक था। इस अनूठी वृद्धि ने भारत को डिजिटल लेनदेन की दुनिया में पहला स्थान दिलाया है।
UPI की सफलता की वजह
आधार और मोबाइल कनेक्टिविटी: डिजिटल पहचान और मोबाइल इंटरनेट की बढ़ती पहुंच ने क्रांति को तेज किया।सुरक्षित और सामान्य तकनीक: वर्चुअल पेमेंट एड्रेस (VPA), मोबाइल नंबर, और QR कोड से त्वरित भुगतान सरकार और रिजर्व बैंक की नीतिगत सहायता: कम शुल्क, डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने वाली योजनाएं और डिजिटल इंडिया मिशन फिनटेक लहर: PhonePe, Paytm, Google Pay और अन्य स्थानीय उपकरणों की पहुँच मोबाइल कनेक्टिविटी और आधार : क्रांति को डिजिटल पहचान और मोबाइल इंटरनेट की बढ़ती पहुंच ने तेज किया।
दुनिया के लिए जैसे बना भारत
भारत अब दूसरे देशों को प्रेरणा दे रहा है। इंटरनेशनल UPI की शुरुआत से पहले सिंगापुर, भूटान, यूएई और फ्रांस ने भारतीय UPI सिस्टम के साथ साझेदारी की है।
आगे की दिशा
सरकार और NPCI का लक्ष्य है कि UPI को और अधिक देशों में लाया जाए और भारत को एक विश्वव्यापी डिजिटल फाइनेंशियल हब बनाया जाए। साथ ही, छोटे व्यापारी और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल लेनदेन को और अधिक प्रोत्साहित करने के लिए नए फीचर्स पर भी काम जारी है।






